अब बैंक डूबने पर मिलेंगे 5 लाख रुपये, क्या FD भी रहेगी सुरक्षित? पैसे कब और कैसे मिलेंगे? जाने सब कुछ – Purijankari

‘डिपॉजिटर्स फर्स्ट: गारंटी टाइम बाउंड डिपॉजिट इंश्योरेंस पेमेंट अप टू 5 लाख रुपए’ प्रोग्राम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि पहले जब बैंक डूबते थे तो आम लोगो को सिर्फ पछतावा होता था लेकिन अगर अब बैंक डूबता है तो 5 लाख रुपये तक की गारंटी मिलती है।

वास्तव में, इसी साल बजट में सरकार के द्वारा डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) कानून में संशोधन किया गया है। जिसमे जमा राशियों पर बीमा को पांच गुना करने की घोषणा सरकार द्वारा की थी। इस अब इस कानून के तहत अब अगर कोई बैंक डूबने या बंद होने की स्थिति में है, तो बैंक में जमा 5 लाख रुपए तक की रकम सुरक्षित है। बता दे के यह रकम पहले 1 लाख रुपए तक थी।

इस साल के बजट में बैंक जमा गांरटी को एक लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की थी। मतलब अगर कोई बैंक डूबता है तो ग्राहकों को 90 दिन के भीतर अधिकतम 5 लाख रुपए मिलेंगे। इसके बाद 28 जुलाई को कैबिनेट ने इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (एमेंडमेंट) बिल, 2021 को मंजूरी दी थी। देखा जाए तो सरकार ने यह कदम पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक, येस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक संकट के चलते लाखों ग्राहकों की परेशानी को देखते हुए उठाया था।

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अगर अब कोई बैंक डूबने या बंद होने की स्थिति में होता है, तो अब आपको अधिकतम 5 लाख रुपए तक मिलेंगे। इसमें मूलधन और ब्याज सभी शामिल होंगे। बता दे के आपके खाते के भले ही 10 करोड़ रुपये जमा हो लेकिन आपको 5 लाख रूपए ही मिलेंगे। लेकिन अगर आपके खाते में 5 लाख रुपये से कम जमा है, तो आपको उतनी ही रकम मिलेगी जितनी जमा है।

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यह रकम आपको डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के द्वारा दी जाएगी। बता दे के DICGC रिजर्व बैंक के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। देश का हर बैंक इसके अंतर्गत रजिस्टर्ड किया जाता है। इसके अलावा भारत में जिन विदेशी बैंकों की शाखाएं हैं, वह सभी इसके दायरे में आती है।

बता दे के आपको 90 दिन के भीतर रकम वापस मिल जाएगी। अगर बैंक डूबता या बंद होता है तो 45 दिन में ही DICGC ग्राहकों के खातों से जुड़ी सारी जानकारी कलेक्ट करेगा। और जांच-पड़ताल के बाद अगले 45 दिन में राशि ग्राहक को लौटा दी जाएगी। पहले बैंक डूबने या बंद होने की स्तिथि में रिफंड मिलने में 8-10 साल लग जाते थे। क्योकि रिफंड के लिए पहले सरकार द्वारा या तो बैंक को मर्ज करने या बेचने की कार्यवाही पूरी करती थी उसके बाद ही ग्राहकों के रुपए लौटाए जाते थे।

यह स्कीम भारत में काम कर रहे सभी कॉमर्शियल बैंकों पर लागू होती है। इनमें विदेशी, ग्रामीण और सहकारी बैंक आते हैं। सहकारी समितियां स्कीम के दायरे से बाहर हैं।

इस स्कीम के दायरे में सेविंग, करंट, फिक्स्ड और रिकरिंग डिपॉजिट सहित सभी तरह के खाते आते हैं।

यह स्कीम सभी कॉमर्शियल बैंकों पर लागू होती है। इसका सीधा सा मतलब है, अगर आपका अकाउंट किसी सरकारी या बड़े प्राइवेट बैंक में हैं तो आपकी रकम इंश्योर्ड है। लेकिन अगर आपको खाता ग्रामीण इलाकों में चलने वाली सहकारी समिति में हैं, तो आपकी रकम इंश्योर्ड नहीं है। इसके अलावा आप https://www.dicgc.org.in/FD_ListOfInsuredBanks.html वेबसाइट पर जाकर भी बैंक चेक कर सकते हैं।

मान लीजिए अगर आपके पैसे दो अलग-अलग बैंकों में जमा है, और दोनों ही डूब जाए तो ऐसी स्थिति में आपको दोनों अकाउंट पर गारंटी मिलेगी। यानी DICGC आपको दोनों बैंकों में होने वाले नुकसान का 5-5 लाख रुपए तक की रकम देगा। लेकिन अगर एक ही बैंक में आपके अलग-अलग अकाउंट हैं तो इस स्तिथि में यह रकम 5 लाख ही होगी।

PPF और बाकी केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत आपके द्वारा किया गया आपका निवेश सुरक्षित रहेगा। दरअसल, ये केंद्र सरकार की स्कीम होती है, इसलिए इनकी गारंटी भी केंद्र सरकार की ही होती है। बैंक केवल एक माध्यम होता है। बैंक के डूबने का इन योजनाओं के निवेश पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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