हाईटेक होगी खेती: एग्रीकल्चर में होगा ड्रोन का इस्तेमाल केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जारी किए SOP – Purijankari

एग्रीकल्चर भी धीरे-धीरे हाईटेक होती जा रही है। अब किसानो को छिड़काव वा खाद-दवा डालने के लिए फसलों के बीच में जाने की जरुरत नहीं होगी। यह सारे काम ड्रोन के द्वारा किए जा सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के द्वारा मंगलवार को कृषि में ड्रोन को इस्तेमाल करने के लिए (SOP) स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी किए कर दिए गए है।

(SOP) स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में फ्लाइंग परमिशन, वेट क्लसिफिकेशन, ड्रोन रजिस्ट्रेशन, पयलेटिंग सर्टिफिकेशन, एयर फ्लाइंग जोन, वेदर कंडीशन, एरिया डिस्टेंस रिस्ट्रिक्शन, ओवर क्राउडेड एरिया रिस्ट्रिक्शन, सेफ्टी इन्शुरन्स, ऑपरेटिंग प्लान, और इमर्जेन्सी हैंडलिंग प्लान सहित अन्य पहलु शामिल है।

खेती में ड्रोन के इस्तेमाल से कई तरह के लाभ होंगे जिनमे एक लाभ लेबर समस्या का भी है। पहले लेबर खेतो के बीच जाकर खाद वा दवाओं का छिड़काव करते थे और उसमे काफी समय लगता था। लेकिन ड्रोन के आ जाने से कम समय में ज्यादा एरिया में दवाओं वा खाद का छिड़काव किया जा सकेगा, साथ ही लेबर की समस्या से भी किसानो को राहत मिलेगी।

  • एरिया में जो भी मार्किंग होगी वह ड्रोन ऑपरेटर की होगी।
  • ड्रोन ऑपरेटर के द्वारा स्वीकृत कीटनाशक का ही उपयोग किया जा सकेगा।
  • कीटनाशक का इस्तेमाल स्वीकृत कंसंट्रेशन वा हाइट पर ही किया जा सकेगा।
  • ऑपरेटर की और से ही फर्स्ट ऐड सुविधा प्रदान की जाएगी।
  • ड्रोन उड़ाने के एक दिन पहले अधिकारी को इसकी जानकारी देनी होगी।
  • ग्राम पंचायत वा पंचायत समिति के अधिकारी के अलावा कृषि अधिकारी को यह जानकारी लिखित में देनी होगी।
  • ड्रोन ऑपरेटर से जुड़े लोगो के अलावा कोई और व्यक्ति उस एरिया में नहीं जा सकेगा।
  • ड्रोन उड़ाने वाली टीम को पायलेट ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें कीटनाशक के क्लीनिकल के इफ़ेक्ट के बारे में जानकारी दी जाएगी।
  • ड्रोन को केवल (DGCA) डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन सर्टिफाइड पायलट ही उड़ा पाएंगे।
  • दवा या खाद छिड़कने के लिए DGCA सर्टिफाइड ड्रोन का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

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देखा जाए तो अभी की स्थिति में सभी किसान ड्रोन को नहीं खरीद सकते है इसके पीछे की मुख्य वजह है ड्रोन की कीमत, अगर देखा जाए तो अभी 20 से 30 लीटर की क्षमता वाले ड्रोन की कीमत करीब 5 लाख रुपये तक है। इस परेशानी को देखते हुए कई कंपनियों के द्वारा किसानो को किराये पर ड्रोन देने की स्कीम लांच की है।

बता दे के एग्री कम्पनिया ड्रोन का किराया प्रति एकड़ 400 रुपये निर्धारित कर चुकी है, इसके अलावा कई कम्पनिया इस योजना से जुड़ रही है। 20 से 30 लीटर क्षमता वाले ड्रोन एक बार में करीब 1 एकड़ एरिया में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर सकते है और इसके लिए उसको करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एग्री ड्रोन को लेकर एक मेला आयोजित किया गया था। जिसमे कई ड्रोन निर्माता कम्पनिया शामिल हुई थी शामिल हुई कंपनियों का कहना था के इस टेक्नोलॉजी के नई होने की वजह से यह इतनी ज्यादा महँगी है, लेकिन किसानो को अगर यह पसंद आती है, तो इसको लोन वा सरकार की और से मिलने वाली सब्सिडी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इस मेले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा ड्रोन टेक्नोलॉजी को भविष्य की क्रांति बताते हुए पांच ड्रोन स्कूल खोले जाने का एलान किया था। ताकि इन स्कूलों में किसानो को ड्रोन उड़ाने की तकनीक सिखाई जा सके।

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नरेंद्र सिंह तोमर ने SOP जारी करते हुए कहा के ड्रोन टेक्नोलॉजी के आने से किसानो की काफी फायदा होने वाला है। इसके आने से रोजगार के रास्ते खुलेंगे साथ ही उन्हेने कहा के ‘देश के कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण केंद्र सरकार के मुख्य एजेंडे में से एक है। ऐसे में कृषि में नई तकनीकों को शामिल करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।’ उन्होंने यह भी बताया के पिछले साल देश में टिड्डियों के प्रकोप को दूर करने के लिए भी ड्रोन वा कई नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था।

ड्रोन के आने से कम समय में ज्यादा एरिया में दवाओं वा खाद का छिड़काव किया जा सकेगा। तथा लेबर की समस्या से भी किसानो को राहत मिलेगी।

अगर आप 20-30 लीटर वाला कीटनाशक वाला ड्रोन खरीदते है तो आपको यह करीब 5 लाख रुपये तक पड़ेगा।

जी नहीं अभी ऐसी कोई योजना शुरू नहीं की गई है।

ड्रोन को उड़ने की तकनीक सिखाने के लिए प्रदेश सरकार के द्वारा 5 स्कूल खोले जाएंगे।

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