अष्टमी व्रत – Ashtami Vrat: जानिए अष्टमी व्रत करने की प्रक्रिया व व्रत से होने वाले लाभ

अष्टमी व्रत(Ashtami Vrat) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं।

अष्टमी व्रत करने की प्रक्रिया:

  • सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करें और देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें।
  • देवी दुर्गा को फल, फूल, मिठाई, और अन्य भोग अर्पित करें।
  • देवी दुर्गा की आरती करें और चालीसा का पाठ करें।
  • पूरे दिन उपवास रखें और जल का सेवन करें।
  • शाम को तारे निकलने के बाद व्रत खोलें।

अष्टमी व्रत से होने वाले लाभ:

  • अष्टमी व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • यह व्रत सुख-समृद्धि और धन-वैभव प्रदान करता है।
  • अष्टमी व्रत से स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • यह व्रत बुद्धि और विवेक प्रदान करता है।
  • अष्टमी व्रत से नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है।

अष्टमी व्रत के कुछ महत्वपूर्ण नियम:

  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • व्रत के दौरान झूठ बोलना, चोरी करना, और क्रोध करना नहीं चाहिए।
  • व्रत के दौरान गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।

अष्टमी व्रत एक बहुत ही फलदायी व्रत है। यदि आप इस व्रत को विधि-विधान से करते हैं, तो आपको निश्चित रूप से लाभ होगा।

कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें:

  • अष्टमी व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
  • यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो व्रत न रखें।
  • व्रत के दौरान यदि आपको कमजोरी महसूस हो, तो व्रत तोड़ सकते हैं।

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2024 में पड़ने वाली मासिक दुर्गा अष्टमी तिथियां:

महीनातिथिदिन
जनवरी18बुधवार
फरवरी16शुक्रवार
मार्च17रविवार
अप्रैल15मंगलवार
मई14बुधवार
जून12शुक्रवार
जुलाई11रविवार
अगस्त13मंगलवार
सितंबर11बुधवार
अक्टूबर10शुक्रवार
नवंबर9रविवार
दिसंबर8सोमवार

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये तिथियां पंचांग के अनुसार हैं और क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।

अष्टमी व्रत कथा(Ashtami Vrat Katha)

पहली कथा

एक बार की बात है, एक साहूकार था जिसके सात बेटे थे। दीपावली से पहले, साहूकार की पत्नी घर की लीपापोती के लिए मिट्टी लेने खदान में गई। गलती से, उसकी कुदाली से एक साही के बच्चे को चोट लग गई और उसकी मृत्यु हो गई। साहूकार की पत्नी को बहुत पश्चाताप हुआ, लेकिन अब कुछ नहीं किया जा सकता था। कुछ दिनों बाद, उसका एक बेटा मर गया। फिर दूसरा, तीसरा, और इस तरह एक साल के भीतर उसके सभी बेटे मर गए।

दुखी होकर, साहूकार की पत्नी ने एक वृद्ध महिला से सलाह ली। वृद्ध महिला ने उसे बताया कि उसकी पत्नी के पाप के कारण उसके बेटों की मृत्यु हुई थी। उसने उसे अष्टमी व्रत रखने और देवी दुर्गा से क्षमा मांगने की सलाह दी।

साहूकार की पत्नी ने वृद्ध महिला की सलाह का पालन किया और अष्टमी व्रत रखा। उसने देवी दुर्गा से क्षमा मांगी और अपने बेटों के जीवन को वापस लाने के लिए प्रार्थना की। देवी दुर्गा उसकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और उसके बेटों को वापस ला दिया।

दूसरी कथा

एक बार की बात है, एक गरीब ब्राह्मण था जिसकी एक बेटी थी। बेटी बहुत सुंदर थी और उसकी शादी एक अमीर राजकुमार से हुई थी। राजकुमारी बहुत खुश थी, लेकिन उसे जल्द ही पता चला कि उसकी सास बहुत क्रूर थी।

सास ने राजकुमारी को बहुत परेशान किया। उसने उसे दिन-रात काम करने के लिए मजबूर किया और उसे कभी भी आराम नहीं करने दिया। राजकुमारी बहुत दुखी थी और उसने अपनी मां को याद किया।

एक दिन, राजकुमारी की मां उसे देखने आई। उसने अपनी बेटी की दुर्दशा देखी और उसे अष्टमी व्रत रखने की सलाह दी। राजकुमारी ने अपनी मां की सलाह का पालन किया और अष्टमी व्रत रखा। उसने देवी दुर्गा से मदद मांगी।

देवी दुर्गा राजकुमारी की भक्ति से प्रसन्न हुईं और उसकी सास को बदल दिया। उसकी सास दयालु और प्यार करने वाली बन गई। राजकुमारी बहुत खुश थी और उसने देवी दुर्गा को धन्यवाद दिया।

शुभकामनाएं!

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