जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय | Jaishankar Prasad ka Jivan Parichay Pdf

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय: जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। वे एक कवि, नाटककार, उपन्यासकार, कहानीकार और निबंधकार थे। उनकी रचनाओं में प्रकृति, प्रेम, विरह, भक्ति और देशभक्ति के भावों का सशक्त चित्रण मिलता है।

प्रकृति की अनुपम सुंदरता, प्रेम की गहराई, और वीरता की प्रेरणा की खोज में, जयशंकर प्रसाद के साहित्यिक संसार में गहराई से उतरें। इस ब्लॉग पोस्ट में छायावादी युग के महान कवि, नाटककार और विचारक की रचनाओं की झलक देखें, और उनके शब्दों के जादू का आनंद लें।

जयशंकर प्रसाद का जन्म

जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी, 1889 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में हुआ था। उनके पिता श्री शिव प्रसाद एक साहूकार थे और उनकी माता श्रीमती आनंद देवी एक गृहिणी थीं।

जयशंकर प्रसाद की शिक्षा

जयशंकर प्रसाद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य में एमए भी किया।

जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक यात्रा

जयशंकर प्रसाद ने अपनी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत कविताएँ लिखकर की। उनकी पहली कविताएँ 1906 में “भारतेन्दु” पत्रिका में प्रकाशित हुईं। इसके बाद उनकी कविताएँ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं।

जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ

जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ हैं:

  • काव्य: “झरना”, “लहर”, “आँसू”, “कामायनी”, “प्रतिनिधि कविताएँ”
  • नाटक: “उरमिला”, “चंद्रगुप्त”, “स्कंदगुप्त”, “ध्रुव”, “विशाख”
  • उपन्यास: “तितली”, “कंकाल”
  • कहानी संग्रह: “प्रेम पथिक”, “कहानी संग्रह”
  • निबंध संग्रह: “छायावाद”, “काव्य और कला”

जयशंकर प्रसाद की प्रमुख विशेषताएँ

  • वे छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
  • उनकी रचनाओं में प्रकृति, प्रेम, विरह, भक्ति और देशभक्ति के भावों का सशक्त चित्रण मिलता है।
  • उनकी रचनाएँ भाव और भाषा दोनों के लिए उच्च कोटि की हैं।

जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक योगदान

जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक योगदान हिंदी साहित्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति, प्रेम, विरह, भक्ति और देशभक्ति के भावों का सशक्त चित्रण किया है। उनकी रचनाएँ भाव और भाषा दोनों के लिए उच्च कोटि की हैं।

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जयशंकर प्रसाद का निधन

जयशंकर प्रसाद का निधन 15 नवंबर, 1937 को वाराणसी शहर में हुआ।

निष्कर्ष

जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के एक महान कवि, नाटककार, उपन्यासकार और निबंधकार थे। उनकी रचनाएँ आज भी आधुनिक हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

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