महादेवी वर्मा का जीवन परिचय | Mahadevi Verma ka Jivan Parichay pdf

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय: महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की छायावादी युग की एक प्रसिद्ध कवयित्री थीं। उन्हें “आधुनिक युग की मीरा” कहा जाता है। उनकी कविताओं में प्रकृति, प्रेम, विरह, निराशा, आशा, मानवता आदि विषयों का मार्मिक वर्णन मिलता है।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में हुआ था। उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता, श्री गोविंद प्रसाद वर्मा, एक वकील थे और उनकी माता, श्रीमती सरस्वती देवी, एक गृहिणी थीं। महादेवी वर्मा की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। बाद में, उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय: साहित्यिक जीवन

महादेवी वर्मा का साहित्यिक जीवन बचपन से ही प्रारंभ हो गया था। उन्होंने अपनी पहली कविता “आषाढ़ का एक दिन” मात्र 12 वर्ष की आयु में लिखी थी। उनकी पहली कविता संग्रह “नीहार” 1930 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद, उन्होंने “दीपशिखा”, “रश्मि” और “यामा” सहित कई अन्य कविता संग्रह प्रकाशित किए।

महादेवी वर्मा की कविताओं में प्रकृति, प्रेम, विरह, निराशा, आशा, मानवता आदि विषयों का मार्मिक वर्णन मिलता है। उनकी कविताएँ भावात्मक और कल्पनाप्रद हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में मानवीय भावनाओं को बहुत ही सूक्ष्मता से व्यक्त किया है।

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महादेवी जी की प्रमुख विशेषताएँ

  • वे छायावादी युग की एक प्रमुख कवयित्री थीं।
  • उन्हें “आधुनिक युग की मीरा” के रूप में भी जाना जाता है।
  • उनकी कविताएँ भाव और भाषा दोनों के लिए उच्च कोटि की हैं।
  • उन्हें साहित्यिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

पुरस्कार और सम्मान

महादेवी वर्मा को उनके साहित्यिक योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण और 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

निधन

महादेवी वर्मा का निधन 11 सितंबर, 1987 को प्रयागराज में हुआ था। उनकी मृत्यु के बाद, उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ

  • कविता संग्रह: नीहार, दीपशिखा, रश्मि, यामा, हार, सप्तपदी, आत्मिका, परिक्रमा, स्मारिका, श्रृंखला, शिल्पा, नीरजा, गीतलता
  • गद्य: त्रिवेणी, संकल्पना, स्मृति की रेखाएं, पथ के साथी, एकाकी संध्या, श्रृंखला की कड़ी
  • नाटक: आत्मा का ताप
  • अनुवाद: गीतांजलि, मधुकरि

महादेवी जी की कविताओं में प्रकृति, प्रेम, विरह, भक्ति और सामाजिक चेतना के भावों का सशक्त चित्रण मिलता है। उनकी कविताएँ भाव और भाषा दोनों के लिए उच्च कोटि की हैं।

महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की एक अमूल्य निधि थीं। उनकी कविताएँ आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।

महादेवी जी का साहित्यिक योगदान:

महादेवी जी का साहित्यिक योगदान हिंदी साहित्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रकृति, प्रेम, विरह, भक्ति और सामाजिक चेतना के भावों का सशक्त चित्रण किया है। उनकी कविताएँ भाव और भाषा दोनों के लिए उच्च कोटि की हैं।

महादेवी जी की कविताएँ आज भी आधुनिक हिंदी कविता की एक महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उनकी कविताएँ आज भी लोगों के मन को छूती हैं और उन्हें प्रेरित करती हैं।

निष्कर्ष

महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की छायावादी युग की एक प्रमुख कवयित्री थीं। उन्हें “आधुनिक युग की मीरा” के रूप में भी जाना जाता है। उनकी कविताओं में प्रकृति, प्रेम, विरह, भक्ति और सामाजिक चेतना के भावों का सशक्त चित्रण मिलता है। उनकी कविताएँ भाव और भाषा दोनों के लिए उच्च कोटि की हैं। उन्हें साहित्यिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

उनकी कविताएँ आज भी आधुनिक हिंदी कविता की एक महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उनकी कविताएँ आज भी लोगों के मन को छूती हैं और उन्हें प्रेरित करती हैं।

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