President Election 2022: जानिए भारत में कैसे होता है राष्ट्रपति चुनाव, राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया – Purijankari

President Election 2022: जैसा की हम सभी जानते है भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा, उसके पहले ही चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वारा कर दी गई है। आयोग ने कहा है के सभी पार्टी अपने सदस्यों के व्हिप जारी नहीं करेगा। बता दे के राष्ट्रपति का चुनाव आम नागरिको के वोटो से तय नहीं किया जाता है,

राष्ट्पति चुनाव में सिर्फ वही लोग वोट डाल सकते है जिनको नागरिक अपना वोट देकर संसद तक पहुंचाते है, यानी विधायक व सांसद। इसके अलावा राष्ट्रपति चुनाव में संसद में नामित सदस्य व विधान परिषद् भी वोट नहीं डाल सकते क्योकि वह जनता द्वारा सीधे चुने नहीं जाते है।

भारत में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया दूसरे देशो से अलग होती है जिसमे राष्ट्रपति का चुनाव जनता के द्वारा नहीं किया जाता बल्कि उन लोगो के द्वारा किया जाता है जिन्हे जनता ने चुन कर संसद तक पहुंचाया है। जिनमे सांसद व विधायक शामिल है। इनके अलावा और किसी को राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने की अनुमति नहीं होती है। यहाँ तक की संसद में नामित सदस्य व विधान परिषद् के सदस्य भी वोट नहीं डाल सकते है। इसका मुख्य कारण यह सीधे जनता द्वारा चुने नहीं जाते है।

राष्ट्रपति का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज करता है, जिसमे जनता सीधे अपने राष्ट्रपति का चुनाव नहीं कर सकती है। राष्ट्रपति का चुनाव वह लोग करते है जिन्हे जनता के द्वारा चुना जाता है, यही है अप्रत्यक्ष निर्वाचन।

राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने का अधिकार राज्यों की विधानसभाओ से चुने गए मेम्बर व लोकसभा व राज्य सभाओ के सांसदों को ही होता है। इसके अलावा राज्यों की विधान परिषदों के सदस्य भी वोटिंग में हिस्सा नहीं ले सकते क्योकि वह जनता द्वारा चुने सदस्य नहीं होते है।

प्रेसिडेंट चुनाव में एक खास तरह की वोटिंग होती है जिसको सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहा जाता है। जिसमे वोटर वोट तो एक ही देता है लेकिन वह सभी कैंडिडेट्स में से अपनी प्रायोरिटी तय कर देता है। यानी वह अपनी पहली, दूसरी व तीसरी पसंद बता देता है। यानी वोटर की पहली पसंद वाला कैंडिडेट्स विजेता नहीं बन पाया तो वोटर का वोट दूसरी पसंद के कैंडिडेट्स को ट्रांसफर हो जाएगा। इस वजह से इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।

President Election में वोट देने वाले सांसदों व विधायकों के वोटो का वेटेज अलग-अलग होता है। इन वेटेज को तय करने की प्रक्रिया को आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था कहते है। देखा जाए वर्तमान में सभी राज्यों के सभी विधायकों के वोट का वैल्यू 5 लाख 43 हजार 231 है। अगर लोकशाभा की बात की जाए तो लोकसभा के सांसदों का कुल वैल्यू 5 लाख 43 हजार 200 है।

विधायकों के मामलो में जिस राज्य का विधायक होता है उस राज्य की आबादी देखी जाती है। इसके अलावा उस राज्य के विधानसभा सदस्यों की संख्या को भी ध्यान में रखा जाता है। विधायकों का वेटेज निकालने के लिए राज्य की आबादी को इलेक्टेड एमएलए की संख्या से डिवाइड किया जाता है। डिवाइड करने पर जो नंबर मिलता है। उसको फिर से 1000 से डिवाइड किया जाता है। अब जो संख्या आती है, वही एक विधयक के वोट का वेटेज होती है। यदि 1000 से डिवाइड करने पर शेष संख्या 500 से अधिक होती है तो वेटेज में 1 जोड़ दिया जाता है।

एक सांसद के वोट का वेटेज अलग होता है। जिसको अलग तरीके से निकाला जाता है। पहले सभी राज्यों के विधानसभाओ के इलेक्टेड मेंबर्स के वोटो का वेटेज जोड़ा जाता है। उसके पश्चात वेटेज को राज्यसभा व लोकसभा के इलेक्टेड मेंबर्स की कुल संख्या से डिवाइड किया जाता है। मिलने वाला वेटेज एक सांसद के वोट का वेटेज होता है। यदि शेष 0.5 से अधिक होता है तो वेटेज में 1 जोड़ दिया जाता है।

यदि राष्ट्रपति उम्मीदवार सबसे अधिक वोट हासिल कर लेता है तो उसको जीता हुआ नहीं माना जाता है। राष्ट्रपति वही बनता है जो सांसदों व विधायकों के कुल वेटेज का आधा हिस्सा वोटो के द्वारा हासिल करता है। मतलब इस चुनाव में पहले से ही तय होता है के जीतने के लिए उम्मीदवार को कितना वेटेज प्राप्त करना होगा। वर्तमान में राष्ट्रपति चुनाव के लिए जो इलेक्टोरल कॉलेज है। उसके सदस्यों के वोटो का कुल वेटेज 10,98,882 है। जिसका मतलब साफ़ है कैंडिडेट्स को जीतने के लिए 5,49,442 वोट प्राप्त करने होंगे। जो उम्मीदवार सबसे पहले यह वेटेज प्राप्त कर लेता है वह जीत जाता है।

सबसे पहली पसंद का मतलब समझने के लिए वोट काउंटिंग में प्रायॉरिटी पर गौर करना होगा। विधायक व सांसद वोट करते वक़्त अपने मतपत्र पर अपनी पहली, दूसरी व तीसरी पसंद के उम्मीदवार को बता देते है। सबसे पहले पहली पसंद के उम्मीदवारों के वोटो की गिनती की जाती है। यदि इस गिनती में पहला उम्मीदवार ही वेटेज के कोटे को हासिल कर लेता है तो वह जीत जाता है। यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर दूसरी प्राथमिकता वाले उम्मीदवार के वोटो की गिनती जाती है।

सबसे पहले उस उम्मीदवार को रेस से बाहर किया जाता है जिनको गिनती में सबसे कम वोट मिलते है। लेकिन उस उम्मीदवार को मिले वोटो में से यह भी देखा जाता है के दूसरे उम्मीदवारों को कितने वोट मिले है। फिर बचे हुए वोट दूसरे उम्मीदवारों के खातों में ट्रांसफर किये जाते है। यही प्रक्रिया को विजेता ना मिलने तक दोहराया जाता है।

जब तक विजेता नहीं मिल जाता तब तक कम वोट पाने वाले उम्मीदवार रेस से बाहर होते रहते है। यदि अंत तक उम्मीदवार को तय किया कोटा नहीं मिलता है तब भी उम्मीदवार रेस से बाहर होते रहते है, वा जो आखरी में बचता है वह विजय कहलाता है।

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