Vice-President Election 2022: जानिए भारत में कैसे होता है, उप-राष्ट्रपति चुनाव – Purijankari

Vice-President Election 2022: भारत में राष्ट्रपति के चुनाव के पश्चात जल्द ही उप राष्ट्रपति के चुनावो की तैयारी शुरू होने वाली है। संभावना है कि उपराष्ट्रपति के चुनाव अगस्त 2022 में हो सकते है। लेकिन चुनाव आयोग की घोषणा कि पश्चात उप राष्ट्रपति कि चुनावो की तैयारी शुरू हो जाएगी।

जैसा की हमें पता होना चाहिए कि उपराष्ट्रपति के चुनाव पहली बार 1952 में हुए थे, इस चुनाव में देश के पहले उप राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन चुने गए थे। उप राष्ट्रपति का कार्यकाल भी 5 वर्षो का होता है, देखा जाए तो उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है।

उप राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज के द्वारा किया जाता है। संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति (Proportional Representation) के माध्यम से किया जाता है। यह वोटिंग खास तरीके से की जाती है, जिसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहा जाता है। बता दे के उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा व राज्य सभा के संसद ही उपराष्ट्रपति को चुनने के लिए अपना वोट डाल सकते है।

उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के पास कम से कम 20 संसद प्रस्तावक व 20 संसद समर्थक होना आवश्यक है। इसके अलावा उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को 15000 हजार रूपए की जमानत राशि जमा करना होती है। इसके पश्चात ही निर्वाचन अधिकारी के द्वारा उम्मीदवार के नाम को बैलेट में शामिल किया जाता है। उम्मीदवार चाहे तो अपना नाम उप राष्ट्रपति पद से वासस भी ले सकता है, उसके लिए उम्मीदवार को निर्वाचन अधिकारी को एक पत्र लिखना होगा।

उप राष्ट्रपति बनने हेतु उम्मीदवार में इन बातो का होना बहुत जरुरी है।

  • उम्मीदवार भारत का स्थाई नागरिक होना चाहिए।
  • उम्मीदवार की आयु न्यूनतम 35 वर्ष होना अनिवार्य है।
  • उम्मीदवार राज्यसभा के लिए चुने जाने के लिए योग्य होना चाहिए।
  • उम्मीदवार को संघ या राज्य क्षेत्र में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना जरुरी है।
  • यदि उम्मीदवार के पास भारत सरकार या किसी राज्य के अधीन कोई सरकारी पद है, तो वह उप राष्ट्रपति पद के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

उप राष्ट्रपति चुनावो में भी राष्ट्रपति चुनाव की तरह अधिक वोट मिलने से उम्मीदवार की जीत तय नहीं की जाती है। उप राष्ट्रपति वही बनता है, जो वोटरों के कुल वेटेज का आधे से अधिक हिस्सा हासिल कर लेता है।

पहली प्राथमिकता को समझने के लिए आपको काउंटिंग को समझना होगा। उप राष्ट्रपति के लिए जिन संसद के द्वारा वोट किया जाता है, वह अपनी पहली, दूसरी व तीसरी पसंद के केंडिडेस को नंबर वॉइस वोट देते है। सबसे पहले वोटरों की पहली पसंद के उम्मीदवार के वोटो की गिनती की जाती है। यदि उम्मीदवार को जीत के लिए जरुरी वेटेज का कोटा प्राप्त हो जाता है, तो उसकी जीत सुनिश्चित कर दी जाती है। यदि ऐसा नहीं हो पता है, तो दूसरी प्राथमिकता वाले कैंडिडेट्स के वोटो की गिनती की जाती है।

जिन उम्मीदवारों को सबसे कम वोट मिलते है वह उम्मीदवार उप राष्ट्रपति पद की रेस से बाहर होते जाते है। लेकिन उम्मीदवार को मिले वोटो में यह देखा जाता है के दूसरे उम्मीदवार को कितने वोट मिले है।

यदि अंत तक किसी उम्मीदवार को तय वेटेज का कोटा प्राप्त नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में उम्मीदवार एक-एक करके बाहर होते जाते है, और अंत में उसको विजय घोषित किया जाता है, जिसके पास सबसे अधिक वोट होते है।

उप राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षो का होता है। लेकिन अकाल मृत्यु, इस्तीफा, बर्खास्तगी या अन्य किसी वजह से उप राष्ट्पति का स्थान रिक्त होता है, तो ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द नया उप राष्ट्रपति चुन लिया जाता है। उप राष्ट्रपति का कार्यकाल पूर्ण होने पर नए 60 दिनों के अंदर उप राष्ट्रपति का चुनाव कराना जरुरी है।

उप राष्ट्रपति उम्मीदवार संसद के किसी भी सदन या विधानसभा के सदन का सदस्य नहीं होता है। यदि संसद के किसी सदन का कोई सदस्य उप राष्ट्रपति बन भी जाता है, तो उसे शपथ ग्रहण करने से पहले अपने पद को छोड़ना होता है।

राष्ट्रपति के बाद उप राष्ट्रपति पद को दूसरा सबसे बड़ा पद माना जाता है। साथ ही उप राष्ट्रपति संसद के उच्च सदन राज्यसभा का अध्यक्ष भी होता है। यदि किसी वजह से राष्ट्रपति का पद खाली हो जाता है, तो वह राष्ट्रपति के पद को सँभालने का इकलौता उत्तरधिकारी माना जाता है।

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