कौन हैं बाबा खाटू श्याम? हारे का सहारा बाबा खाटू श्याम हमारा

खाटू श्याम जी का जिक्र महाभारत में किया गया हैं। यह पाण्डुपुत्र भीम के पौत्र थे और साथ ही  खाटू श्याम भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। 

खाटू श्याम का असली नाम बर्बरीक था। इन्हें शीश दानी के नाम से पूजा जाता है। 

भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के त्याग से प्रसन्न् होकर उन्हें अपना नाम श्याम दिया था, जो खाटू श्याम के नाम से प्रसिद्ध हुए। 

महाभारत के समय बर्बरीक महाशक्तिशाली योद्धा थे। 

महाभारत के समय युद्ध के दौरान बर्बरीक कुरुक्षेत्र आ रहे थे और श्रीकृष्ण जानते थे कि अगर बर्बरीक युद्ध में शामिल हुआ तो परिणाम पाण्डवों के विरुद्ध होगा। 

तभी श्री कृष्ण गरीब ब्राह्मण बनकर बर्बरीक के सामने आते हैं और और पूछते हैं की तुम कौन हो और कुरुक्षेत्र क्यों जा रहे हो। 

बर्बरीक ने बताया कि वह एक दानी योद्धा है जो अपने एक ही बाण से ही महाभारत युद्ध का निर्णय कर सकता है। 

श्रीकृष्ण बर्बरीक की क्षमता से बहुत हैरान थे और बर्बरीक को युद्ध में भाग लेने से रोकना चाहते थे। इसके लिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से उसका शीश मांग लिया। 

बर्बरीक समझ गए कि यह ब्राह्मण नहीं कोई और है और वास्तविक परिचय देने के लिए कहा। श्रीकृष्ण ने अपना परिचय दिया तो बर्बरीक ने खुशी-खुशी शीश दान देना स्वीकर कर लिया। 

तभी श्री कृष्णा ने बर्बरीक को कलयुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया।   

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